उसने इतनी नजाकत से मेरे होठों को छुआ ,
कि रोजा भी न टूटा और इफ्तारी भी हो गई .
अंदाज़
वैसे तो मुस्कुराने वाले बहुत हैं जहां में, मेरे मुस्कुराने का अंदाज़ ही अलग है
Monday, 19 December 2011
Tuesday, 4 October 2011
नज़्म-4

इश्क करने वालो से पूछो , मजबूरी क्या चीज़ है ?
अपनों का दिल तोडना तो यारो बहुत आसान है ।
परिंदों से पूछो , उचाई क्या चीज़ है ?
ज़मीन पर रेगना तो यारो बहुत आसान है ।
क़यामत तक जीने वालों से पूछो , ज़िन्दगी क्या चीज़ है ?
पंखे से झूल कर मरना तो यारो बहुत आसान है ।
जो जीते है दुसरो के लिए उनसे पूछो , पुण्य क्या चीज़ है ?
गंगा नहा कर पाप धोना तो यारो बहुत आसन है ।
गर्दन पर सूली रख जो जीते हैं उनसे पूछो , मेहनत क्या चीज़ है ?
.....अमानत लूट कर ऐश करना तो यारो बहुत आसान है ।
जो मरते हैं इज्जत के लिए , उनसे पूछो शराफत क्या चीज़ है ?
पल भर में चरित्र खोना तो यारो बहुत आसान है ।
ग़ालिब से जाकर पूछो यारो .. नज़्म क्या चीज़ है ??
..घंटे भर में शायर लिखना तो *यज्ञ* बहुत आसान है ।
~यज्ञ
2:57 AM
4/10/2011
Tuesday, 27 September 2011
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह
जन्मदिन : 27 Sep 1907
शहीद भगत सिंह को जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं । भारत के आज़ाद होने के बाद तो लगभग सभी चेहरों से नकाब हट गया था ।
लेकिन ये चेहरा उन चंद चेहरों में से है जो सहनशक्ति , बहादुरी , देश भक्ति , आत्मबल और कुर्बानी का प्रतीक है और आने वाले समय में भी ऐसे ही एक प्रतीक बना रहेगा ।
*उठे थे जिस तरह ये वतन के लिए ,
वैसा न कोई कभी खड़ा हुआ ...
रूह तो तन से अलग हो गयी पर ,
*Inquilaab Zindabaad* जुबान से जुदा न हुआ ।
तलाशी थी इन्होने जन्नत जमीं से ,
आसमान में अपना काफिला बनाया ,
गुलशन को गुल बह़ार से सजाकर ,
वतन को आज़ाद परिंदा बनाया ।
इंकलाब जिंदाबाद
~यज्ञ
Monday, 19 September 2011
विचार-2
ताज्जुब हुआ कि अकेलापन इतना बुरा भी नहीं है ,
लोग लोगों से घिरे होने के बाद भी कितने दुखी है .
ताज्जुब की बात तो ये भी है कि ,
पागलपन भी कोई शिकायत नहीं ,
पैसा हो तो पागल ,लड़की न हो तो पागल .
मोहब्बत में हो तो पागल , न हो तो पागल .
बात तो इतनी पेचिंदा हो गयी है कि,
ऐसे माहौल में जीते जीते एक ऐसा दिन आएगा ,
ज़ब मौत ज़िन्दगी की सबसे सुखमय चीज़ होगी .
पाने के लिए लोग मदहोश और व्याकुल होगे .
न मौत के बारे में कोई प्रश्न होगा ,
न उसके समर्थन में कोई उत्तर..
न कोई रोने वाला,
न कोई उठाने वाला .
एक आम बात होगी लोगों के लिए ,
कि फ़लाने का आज देहांत हो गया.
ऐसा सुनने पर तो बस एक ही बात बोलेगे लोग,
चलो अच्छा हुआ , अब भगवान् कभी हमारी भी सुने :(
जिंदा रहने के बहुमूल्य इक्षा को ,
पुडिये में लपेट कर फेकने वाले लोगों
की संख्या को दिन पर दिन बढ़ते देख ,
मुझे बहुत खेद हो रहा है ..
भगवान् मुझे शक्ति दो ,
पहचान सकूँ अपने आपको इस भीड़ में ,
अलग कर सकूँ, मै अपने आपको इस सोच से .
मोहब्बत हो जाए ज़िन्दगी से ,
मानवता की रस को पीने के लिए,
सातों जन्म व्याकुल रहूँ..
~Yagya
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